पीलीभीत।
बाढ़ से घिरे बडेपुरा धरमा गांव में उस समय उम्मीद की किरण फूटी, जब प्रसव पीड़ा से जूझ रही प्रीति के लिए पूरा गांव ही परिवार बन गया। चारों तरफ पानी ही पानी, खेत-खलिहान डूबे हुए और रास्ते तालाब जैसे, ऐसे में गांव की चाची-ताई से लेकर प्रशासनिक अधिकारी तक मदद को जुट गए।
सुबह अचानक प्रीति को प्रसव पीड़ा हुई, परिजन घबराए और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फोन किया, तो जवाब मिला—“किसी तरह गर्भवती को गांव के बाहर तक लाना होगा।” लेकिन बाहर निकलने का रास्ता पानी से लबालब था, तभी एसडीएम नागेंद्र सिंह गांव पहुंचे, उन्होंने तुरंत अपना ट्रैक्टर-ट्रॉली ही एंबुलेंस बना दिया। उसी पर प्रीति और परिवार को बैठाकर जलमग्न रास्तों से निकाला गया।
तीन किलोमीटर की जद्दोजहद के बाद जब सड़क सूखी मिली तो वहां पहले से एंबुलेंस इंतजार कर रही थी। अस्पताल पहुंचने के बाद दोपहर को प्रीति ने बेटे को जन्म दिया। खुशी इतनी बड़ी थी कि थकान सब भूल गई। नवजात को देखते ही परिवार के मुंह से अनायास निकला—“सैलाब सिंह आया है!”
यह खबर पलभर में गांव-गांव फैल गई और पूरा इलाका इस नवजीवन को बाढ़ के बीच उम्मीद का प्रतीक मानने लगा। अब बडेपुरा ही नहीं, आसपास के गांव भी इस बच्चे को उसी नाम से पुकार रहे हैं—‘सैलाब सिंह’







