लखनऊ, राजनीतिक रिपोर्ट | बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का सियासी आधार लगातार कमजोर होता जा रहा है, विधानसभा से लेकर संसद तक पार्टी की मौजूदगी लगभग समाप्ति की ओर है, वर्तमान स्थिति को देखें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा का सिर्फ एक विधायक बचा है, जबकि विधान परिषद में पार्टी का कोई भी सदस्य नहीं है।
संसद में भी बसपा की स्थिति बेहद कमजोर है, लोकसभा में इस समय बसपा का कोई सांसद नहीं है। वहीं, राज्यसभा में पार्टी के इकलौते सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल वर्ष 2026 में समाप्त हो जाएगा, इसके बाद राज्यसभा में भी बसपा का कोई प्रतिनिधि नहीं बचेगा।
इस तरह वर्ष नवंबर 2026 के बाद संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व शून्य हो जाएगा, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति बसपा के लिए एक बड़े सियासी संकट का संकेत है, क्योंकि पार्टी की आवाज न तो प्रदेश की विधान परिषद में होगी और न ही देश की संसद में।
कुल मिलाकर, सत्यापित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि बहुजन समाज पार्टी इस समय अपने सबसे कमजोर राजनीतिक दौर से गुजर रही है और आने वाले समय में उसके सामने संगठन और जनाधार को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी है।





