नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र बनकर रहेगा और इसे कोई नहीं रोक सकता, उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली की जड़ें हिंदू विचारधारा में निहित हैं। उन्होंने इसे किसी राजनीतिक एजेंडे से जोड़ने के बजाय भारत की सभ्यतागत पहचान बताया।
हालांकि, विशेषज्ञों और विपक्षी दलों का कहना है कि भारत का संविधान देश को एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित करता है, और किसी भी प्रकार से देश की आधिकारिक पहचान में बदलाव केवल संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही संभव है।
गौरतलब है कि RSS प्रमुख का यह बयान उनका वैचारिक दृष्टिकोण दर्शाता है, न कि भारत की मौजूदा संवैधानिक स्थिति में किसी परिवर्तन की घोषणा, इस बयान को लेकर जहां समर्थक इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं आलोचक इसे राजनीतिक बयानबाज़ी मान रहे हैं।







