नई दिल्ली | भारतीय रुपया आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में नजर आया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में 1 अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया करीब 91.50 से 91.70 के दायरे में कारोबार करता दिखा, वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की निकासी के चलते रुपये पर दबाव बना हुआ है।
क्यों कमजोर हुआ रुपया?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार,
* अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी
* वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
* विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा पूंजी निकासी
* कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
इन सभी कारणों से रुपये की चाल प्रभावित हुई है, डॉलर की बढ़ती मांग ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं, खासकर रुपये, पर दबाव बढ़ाया है।
RBI की भूमिका पर नजर:
विश्लेषकों का मानना है कि यदि गिरावट तेज होती है, तो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये को स्थिरता देने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, फिलहाल RBI की ओर से कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।
आम आदमी पर असर:
रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है।
* आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं
* ईंधन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतों पर दबाव
* विदेश यात्रा और विदेशी पढ़ाई का खर्च बढ़ सकता है
वहीं, निर्यातकों को कमजोर रुपये से कुछ हद तक फायदा मिलने की संभावना रहती है।
कुल मिलाकर, डॉलर के मुकाबले रुपया फिलहाल कमजोर लेकिन नियंत्रित दायरे में बना हुआ है, आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतियों और RBI के कदमों पर बाजार की नजर रहेगी।





