महराजगंज जनपद में सवर्ण समाज और सनातन ब्राह्मण महासंस्था ट्रस्ट ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित यूजीसी प्राविधान-2026 का विरोध जताया है। मंगलवार को संगठन के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपकर इन प्राविधानों को तत्काल वापस लेने की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया है कि यूजीसी के नए प्राविधान सामान्य (सवर्ण) वर्ग के छात्र-छात्राओं के शैक्षिक अधिकारों और समान अवसरों को प्रभावित करेंगे। प्रतिनिधियों का कहना है कि इससे योग्यता आधारित शिक्षा व्यवस्था कमजोर होगी और इन प्राविधानों के दुरुपयोग की संभावना भी बनी रहेगी, जो सामाजिक संतुलन को बिगाड़ सकती है।
सवर्ण समाज के पदाधिकारियों ने 13 जनवरी 2026 को प्रकाशित राजपत्र संख्या-40/सीबीडीएलअ 130/2026-269317 का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इसमें शामिल नियम समतामूलक भावना के अनुरूप नहीं हैं और इससे सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रस्तावित प्राविधान समाज में वैमनस्य और असंतोष की भावना को बढ़ावा दे सकते हैं। प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा राष्ट्र की प्रगति की रीढ़ होती है और यदि शिक्षा नीति योग्यता और समान अवसर के सिद्धांतों से हटती है, तो इसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
सवर्ण समाज और सनातन ब्राह्मण महासंस्था ट्रस्ट का कहना है कि ऐसे नियम देश की सामाजिक एकता को कमजोर कर सकते हैं और आंतरिक कलह को जन्म दे सकते हैं, जो राष्ट्रहित के विरुद्ध है। उनका आरोप है कि ये प्राविधान हिंदू समाज को विभाजित करने वाले हैं।
ज्ञापन के माध्यम से सरकार से अपील की गई है कि समाज में विभाजन पैदा करने वाले किसी भी प्रयास को रोका जाए। सवर्ण समाज ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि उक्त राजपत्र में वर्णित प्राविधानों पर पुनर्विचार कर उन्हें वापस लिया जाए।
प्रतिनिधियों ने मांग की है कि देश में ऐसी शिक्षा नीति लागू की जाए, जो सभी वर्गों के लिए समान, न्यायसंगत और योग्यता आधारित हो, ताकि सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता बनी रहे।





