नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सालों पुराने एक मामले में अदालत के आदेश के बाद उन्हें तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करना पड़ा है, यह मामला करीब 10–16 साल पुराना चेक बाउंस और कर्ज विवाद से जुड़ा हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी फिल्म “अता पता लापता” के निर्माण के लिए दिल्ली की Murali Projects Pvt Ltd नामक कंपनी से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई, जिसके बाद कर्ज चुकाने में समस्या शुरू हो गई।
चेक बाउंस से बढ़ी कानूनी मुश्किलें:
कर्ज चुकाने के लिए राजपाल यादव और उनकी पत्नी की ओर से दिए गए कई चेक बाउंस हो गए। इसके बाद कंपनी ने उनके खिलाफ Negotiable Instruments Act की धारा 138 (चेक बाउंस कानून) के तहत केस दर्ज कराया।
कोर्ट का फैसला और सजा:
लंबी कानूनी सुनवाई के बाद 2018 में निचली अदालत ने राजपाल यादव को दोषी करार देते हुए 6 महीने की सजा सुनाई। हालांकि, उन्होंने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिसके चलते उन्हें समय-समय पर राहत मिलती रही।
आत्मसमर्पण का आदेश:
हाल के दिनों में अदालत ने साफ कर दिया कि अब और राहत नहीं दी जा सकती। भुगतान न होने और कोर्ट के आदेशों का पालन न होने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया, जिसके बाद उन्होंने तय तारीख पर तिहाड़ जेल में सरेंडर किया।
कितनी हो गई बकाया रकम?
समय के साथ ब्याज और जुर्माने के कारण यह रकम बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई बताई जा रही है।
फिल्म इंडस्ट्री का रिएक्शन:
राजपाल यादव के जेल जाने की खबर के बाद फिल्म इंडस्ट्री से कई कलाकार उनके समर्थन में सामने आए। कुछ सितारों ने आर्थिक मदद और कानूनी सहयोग की बात भी कही है।
राजपाल यादव का जेल जाना किसी नए अपराध से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह एक दशक से ज्यादा पुराने चेक बाउंस केस में कोर्ट के आदेश का परिणाम है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए समान है और किसी को विशेष रियायत नहीं दी जा सकती।




