मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, यहाँ ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि लगभग 25 लाख की लागत से बना सार्वजनिक सरोवर (अमृत सरोवर योजना के तहत) अचानक “गायब” हो गया है, ग्रामीणों का कहना है कि न तो सरोवर का कोई अता-पता है और न ही उसके निर्माण का कोई सबूत दिखाई देता है।
RTI में हुआ खुलासा :
सूचना का अधिकार (RTI) के जरिए पता चला कि संबंधित सरोवर का निर्माण सरकारी रिकॉर्ड में पूरा दिखाया गया है, लेकिन जमीन पर उसकी मौजूदगी ही नहीं है, यहाँ तक कि प्रशासनिक निरीक्षण में भी पाया गया कि यह तालाब सरकारी भूमि पर न बनकर निजी जमीन पर दर्ज किया गया था।
ग्रामीणों की पहल – मुनादी और इनाम की घोषणा :
ग्रामीणों ने लंबे समय से प्रशासन और पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला तो उन्होंने गाँव में मुनादी कर तालाब खोजने वाले को इनाम देने की घोषणा कर दी, इस अनोखे विरोध से मामला सुर्खियों में आ गया।
प्रशासनिक कार्रवाई :
मामले की गंभीरता को देखते हुए रीवा कलेक्टर ने जांच के आदेश जारी किए हैं। वहीं, पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई गई है, शुरुआती जांच में यह साफ हुआ कि फर्जीवाड़े के जरिए योजनागत रकम खर्च कर तालाब को सिर्फ कागजों पर ही दिखाया गया है।
रीवा का यह मामला एक तरफ जहाँ भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल खोलता है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों के व्यंग्यपूर्ण विरोध ने पूरे प्रदेश का ध्यान आकर्षित किया है, अब देखना होगा कि प्रशासन की जांच से आखिर इस “गायब तालाब” का राज कब और कैसे सामने आता है।








