प्रयागराज के अत्तरसुइया स्थित टैगोर पब्लिक स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली सुकैना रिजवी ने अपनी मां के जरिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। छात्रा का कहना था कि वह कक्षा 6 से 10 तक स्कूल में हिजाब पहनकर पढ़ाई करती रही है और इस दौरान स्कूल की ओर से कभी कोई आपत्ति नहीं जताई गई। छात्रा ने अपनी याचिका के साथ पुराने पहचान पत्र और स्कूल की ग्रुप फोटो भी दाखिल की थी।
छात्रा ने कोर्ट में कहा कि अब वह 11वीं कक्षा में भी हिजाब पहनकर स्कूल जाना चाहती है, लेकिन उसे इसकी अनुमति नहीं दी जा रही है। इस मामले में परिवार की ओर से डीएम से भी शिकायत की गई थी, जिसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) से रिपोर्ट मांगी गई।
वहीं, स्कूल के प्रिंसिपल ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि यह एक शिक्षा संस्थान है, जहां सभी छात्रों के लिए एक समान ड्रेस कोड निर्धारित है। किसी एक छात्रा को अलग से छूट देने से स्कूल की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि हिजाब पहनना उसकी धार्मिक मान्यता से जुड़ा हुआ है। इसे पहनने से उसे निजता, व्यक्तिगत आजादी और बोलने की आजादी जैसे मौलिक अधिकार प्राप्त होते हैं। ऐसे में स्कूल को उसे हिजाब पहनने से रोकने का निर्देश नहीं दिया जाना चाहिए।
हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सोमवार को कहा कि स्कूल में निर्धारित यूनिफॉर्म के नियम का पालन करना जरूरी है। यूनिफॉर्म से बच्चों के बीच समानता की भावना बनी रहती है, स्कूल की एक अलग पहचान कायम होती है और बिना किसी धार्मिक भेदभाव के वातावरण सुनिश्चित होता है।
कोर्ट ने साफ कहा कि कोई भी छात्रा स्कूल के तय किए गए ड्रेस कोड को अपनी इच्छा के अनुसार बदलने की जिद नहीं कर सकती।
कोर्ट ने कहा: व्यक्तिगत आधार पर हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह यूनिफॉर्म के विचार के ही खिलाफ होगा। इससे स्कूल के अनुशासन को तय करने का अधिकार संस्थान के बजाय अलग-अलग छात्रों के हाथ में चला जाएगा।






