लखनऊ, 09 सितम्बर 2026 | लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा बुधवार को विभागीय परिसर में ‘जिज्ञासा यज्ञ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दोपहर 2:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम का मूल मंत्र जिज्ञासा जगाएँ प्रश्न पूछें, प्रश्नों को शोध तक पहुँचाएँ रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में निर्भीक होकर प्रश्न पूछने, जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने तथा उसे शोध एवं नवाचार से जोड़ने की संस्कृति विकसित करना था। कार्यक्रम के दौरान यज्ञ का आयोजन किया गया।


इसके साथ ही बीएड के छात्रों द्वारा ‘जिज्ञासा की शक्ति’ विषय पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर जागरूकता की पहल की गई। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि प्रश्न कमजोरी नहीं, सीखने की शक्ति हैं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के मन में उत्पन्न होने वाले प्रश्नों और उनके भीतर मौजूद भय को दूर करने, निर्भीक होकर प्रश्न पूछने तथा जिज्ञासा को समाधान की दिशा में ले जाने पर विशेष जोर दिया गया।
इससे पूर्व पोस्टर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। शैक्षिक वातावरण एवं मानसिक प्रदूषण को दूर करने के उद्देश्य से सभी छात्रों ने धूपबत्ती जलाकर सभी कक्षाओं को सुगंधित करने का प्रयास किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संकायाध्यक्ष प्रो. श्रवण कुमार ने की। उन्होंने कहा, प्रश्नशीलता ही ज्ञान-विस्तार की पहली सीढ़ी है।
इस अवसर पर चीफ प्रोवोस्ट प्रो. आशीष अवस्थी, अतिरिक्त प्रोवोस्ट प्रो. महेन्द्र अग्निहोत्री, चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी तथा छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. अमिता कन्नौजिया ने जिज्ञासा, प्रश्नशीलता, तार्किक चिंतन और नवाचार को विद्यार्थियों के विकास तथा शोध संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. सुमित गंगवार एवं डॉ. हेमेन्द्र कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को जिज्ञासा को शोध से जोड़ने का संदेश दिया।कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षाशास्त्र विभाग के प्रो. तृप्ता त्रिवेदी, प्रो. दिनेश कुमार, प्रो. अपर्णा गोडबोले, प्रो. मुनेश कुमार, प्रो. किरण लता डंगवाल, प्रो० आकांक्षा सिंह, डॉ. नीतू सिंह, डॉ. सूर्य नारायण गुप्ता, डॉ. देवेंद्र कुमार यादव, डॉ. सुमित गंगवार, डॉ. संजय सिंह यादव एवं डॉ. पूनम श्रीवास्तव ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

डॉ. पूनम श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनकी जिज्ञासाओं को शोधपरक दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विभाग के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों गिरजेश पासवान, अभिषेक श्रीवास्तव “बाबू”, प्रज्ञा सिंह, श्रेया कटियार, शिखा शुक्ला, शिवांगी पांडे, निदा, अनुक्त कृति, सिंकी चौरसिया, आयुषी यादव, प्रगति जायसवाल, सौरभ, सिमरन श्रीवास्तव, अनामिका यादव, रागिनी, राखी, जागृति, अनुकृति, प्रियंका जोशी, जितेंद्र कुमार यादव, रमन कनोजिया, राज गुप्त, प्रदीप वर्मा, अनुभूति, सुभद्रा, मयूरी कनोजिया, स्वर्णिमा तिवारी, वैशाली भट्ट, निहारिका बाजपेयी, शिवम, अनमोल शुक्ला, इमरान, संदीप दास, ज्योत्सना, श्रृंखला पाल, आयुषी मालवीय, आस्था यादव, सहर्ष, तेज बहादुर सहित सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

वहीं कर्मचारी गण रणधीर यादव, बंसी यादव, अभिषेक पाल, मुकेश चौधरी, ललित तिवारी, राजवीर मिश्रा, बृजेश सहित काफी लोग मौजूद रहे।

“जिज्ञासा की शक्ति” विषय पर प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को सवाल पूछने, अपनी जिज्ञासा को व्यक्त करने और उसे सीखने तथा शोध की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम का समापन “प्रश्न ही प्रगति की पहली सीढ़ी है” तथा “जिज्ञासा की ज्योति प्रज्वलित करें” के संकल्प के साथ हुआ।






