लखनऊ: लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग एक बार फिर सामने आई है। छात्र-छात्राओं की समस्याओं, उनके हितों और लोकतांत्रिक सहभागिता को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि मंडल की आवश्यकता बताई गई है। लखनऊ विश्वविद्यालय में आखिरी बार छात्र संघ चुनाव सन् 2005 में हुआ था। इसके बाद छात्र संघ चुनाव बंद हुए 21 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक चुनाव बहाल नहीं किए गए।

छात्रों की ओर से कहा गया है कि 21 मार्च 2012 को उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश के बाद भी लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल नहीं किया गया। इन 21 वर्षों के दौरान विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के सामने तमाम समस्याएं आईं, लेकिन निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि मंडल न होने के कारण वे अपनी समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख पाए।
छात्र संघ चुनाव को लेकर यह भी कहा गया है कि लोकतांत्रिक भारत में छात्र संघ चुनाव केवल छात्र-छात्राओं की जरूरत नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है। वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय और पटना विश्वविद्यालय समेत कई विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव बहाल हैं।
अनुच्छेद 19 के तहत संघ बनाने का मौलिक अधिकार संविधान प्रदत्त है। इसके साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव अनिवार्य रूप से कराए जाने का निर्देश जारी किया था।

यह निर्देश माननीय उच्चतम न्यायालय के 22 सितम्बर 2006 के आदेश और लिंगदोह समिति की संस्तुतियों के आधार पर जारी किया गया था। इसी को आधार बनाते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव जल्द बहाल कराने की मांग की गई है। मांग है कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक एवं अन्य उचित समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष लोकतांत्रिक और व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए छात्र संघ चुनाव आयोजित कराए जाएं।
इस संबंध में बी.ए. तृतीय वर्ष के छात्र मार्तण्ड विक्रम सिंह, प्रभात सिंह (बी.ए. तृतीय वर्ष) और शिवाश सिंह (बी.ए. तृतीय वर्ष) की ओर से लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति को आवेदन देकर छात्र संघ चुनाव जल्द बहाल कराने की मांग की गई है।









