अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कब क्या कह दें और अगले ही पल क्या कर बैठें, ये कोई भी आसानी से अंदाज़ा नहीं लगा सकता। एक ओर वे भारत पर 50% टैरिफ जड़ देते हैं, तो दूसरी ओर भारत को अपना “सच्चा दोस्त” बताने से भी नहीं चूकते, अमेरिका की यही उलझी हुई नीतियाँ हमेशा चर्चा में रहती हैं।
इसी कड़ी में शुक्रवार को जी-7 की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्री वीडियो कॉल पर बैठक करेंगे। इसमें ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका द्वारा यूक्रेन शांति समझौते की कोशिशों के तहत तैयार किए गए नए प्रस्तावों पर विचार होगा, सूत्रों का दावा है कि अमेरिका इस बैठक में जी-7 देशों पर दबाव बनाएगा कि भारत और चीन द्वारा रूसी तेल की खरीद पर भारी शुल्क लगाया जाए।
शुल्क कितना होगा, इस पर अभी तक कोई पक्की जानकारी नहीं है, लेकिन कहा जा रहा है कि अमेरिका 50 से 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का सुझाव दे रहा है, इससे पहले अमेरिकी वित्त विभाग के प्रवक्ता ने साफ कहा था—”अगर यूरोपीय देश सचमुच युद्ध को खत्म करने के लिए गंभीर हैं, तो उन्हें हमारे साथ खड़े होकर सार्थक शुल्क लगाने होंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि G7 के साझेदारों को अब निर्णायक कदम बढ़ाने की ज़रूरत है। याद दिला दें, पिछले महीने अमेरिका ने भारत पर टैरिफ बढ़ाकर 50% कर दिया था। वहीं, यूरोपीय संघ भी अपनी गैस का लगभग पाँचवाँ हिस्सा रूस से ही खरीदता है।






