महराजगंज जनपद में बरसात के मौसम ने एक बार फिर प्रशासन की पोल खोल दी है। करोड़ों रुपए की मरम्मत और दावों के बावजूद महाव नाले का तटबंध बुधवार दोपहर करीब 1 बजे बरगदवां गाँव के पास किसान बेचू (निवासी चकरार) के खेत में करीब 20 मीटर तक ध्वस्त हो गया। देखते ही देखते आसपास के गाँवों में पानी भर गया और किसानों की खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं।

ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल सिंचाई विभाग मरम्मत के दावे करता है, लेकिन सच्चाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है। घटिया निर्माण और खानापूर्ति का नतीजा है कि नाला पहली ही बरसात में टूट जाता है।

किसानों ने दुख जताया कि धान और खरीफ की पूरी फसल चौपट हो गई, मेहनत पर पानी फिर गया। उनका कहना है कि हर साल करोड़ों की धनराशि मरम्मत के नाम पर डकार ली जाती है, और जब नाला टूटता है तो इसकी सीधी मार जनता को झेलनी पड़ती है।
महाव नाले का बार-बार टूटना न सिर्फ किसानों की बर्बादी है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का खुला सबूत भी है। बड़ा सवाल यही है—कब तक जनता इस लापरवाही की कीमत अपनी मेहनत और फसलों से चुकाती रहेगी?





