बैक्टीरिया असंतुलन से बढ़ा आईबीएस का खतरा, युवा तेजी से आ रहे चपेट में

बैक्टीरिया असंतुलन से बढ़ा आईबीएस का खतरा, युवा तेजी से आ रहे चपेट में

महराजगंज ; मानसून की शुरुआत के साथ ही बैक्टीरिया जनित बीमारियों में इज़ाफा हुआ है, जिससे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, विशेषज्ञों के अनुसार, अनियमित खानपान, विशेषकर फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन और योग-व्यायाम से दूरी, युवाओं को इस पाचन तंत्र संबंधी रोग की ओर धकेल रहा है।

जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना औसतन 5 से 6 आईबीएस के मरीज पहुँच रहे हैं, सोमवार को इनकी संख्या बढ़कर 10 हो गई, चिकित्सकों का कहना है कि यह रोग मुख्यतः आंतों में बैक्टीरिया के असंतुलन के कारण होता है, जिससे बार-बार शौच की इच्छा, अपाचन, गैस, पेट में दर्द और पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

फास्ट फूड से बढ़ रही समस्या :
डॉ. पवन कुमार ने बताया कि विशेष रूप से 20 से 30 वर्ष की आयु के युवा पेट भरने के लिए फास्ट फूड का सहारा ले रहे हैं, अधिक तला-भुना और बाहर का भोजन आंतों में सूक्ष्मजीव संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि इस स्थिति में शरीर को आवश्यक पोषण नहीं मिल पाता, जिससे थकावट और कमजोरी की शिकायत भी देखने को मिल रही है।

बरसात में खतरा और अधिक :

सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी के अनुसार, बरसात के मौसम में संक्रमण और बैक्टीरिया जनित रोग तेजी से फैलते हैं, ऐसे समय में गलत खानपान और शारीरिक सक्रियता की कमी से आईबीएस जैसी समस्याएं अधिक उभर कर सामने आती हैं।

समाधान: खानपान में सुधार और योग जरूरी :
चिकित्सकों की सलाह है कि लक्षण दिखते ही तुरंत फास्ट फूड और बाहर के भोजन से परहेज़ करना चाहिए, हल्का और घर का बना भोजन लें तथा योग-प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करें, चिकित्सकीय परामर्श से दवाओं का सेवन करने पर यह समस्या सामान्यतः 8 से 10 दिनों में पूरी तरह ठीक हो सकती है।

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