भारत का मिडिल क्लास वर्ग आज दिखावे की जिंदगी जीने की ओर तेजी से बढ़ रहा है, लोग महंगे मोबाइल फोन, लग्जरी गाड़ियां और शानदार लाइफस्टाइल अपनाने के लिए लोन और ईएमआई पर निर्भर होते जा रहे हैं। यानी अब लोगों के पास खर्च करने की ताकत नहीं, बल्कि लोन लेने की आदत बढ़ती जा रही है।
वहीं दूसरी ओर, देश के अमीर वर्ग बिना दिखावा किए अपनी संपत्ति और निवेश को लगातार बढ़ा रहे हैं, चार्टर्ड अकाउंटेंट नितिन कौशिक ने अपनी हालिया पोस्ट में इसी बढ़ते ट्रेंड पर चिंता जताई है, उन्होंने कहा कि भारत में लोगों का इस तरह लोन लेकर खर्च करना देश की फाइनेंशियल हेल्थ के लिए खतरनाक संकेत है।
कौशिक के मुताबिक, अब मिडिल क्लास जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि दूसरों को प्रभावित करने के लिए कर्ज ले रहा है — और यही सबसे बड़ी गलती है। उन्होंने बताया कि पर्सनल लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया — लगभग हर दूसरा भारतीय किसी न किसी प्रकार के कर्ज में फंसा हुआ है।
उनके अनुसार, आज भारत में करीब 70% iPhone और 80% कारें EMI पर खरीदी जाती हैं, जो दिखाता है कि मिडिल क्लास कर्ज के सहारे ‘स्टाइलिश’ जीवन जीने की कोशिश कर रहा है।
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 से मई 2025 के बीच भारतीयों ने 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का पर्सनल लोन लिया है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा युवा नौकरीपेशा वर्ग का है, इसी अवधि में डीमैट खातों की संख्या 19 करोड़ के पार पहुंच गई है, इससे स्पष्ट होता है कि अब लोग लोन लेकर शेयर बाजार में भी पैसा लगा रहे हैं — जो एक्सपर्ट्स के मुताबिक बेहद जोखिम भरा कदम है।
नितिन कौशिक ने अपनी पोस्ट में एक वायरल उदाहरण भी साझा किया, जिसमें एक व्यक्ति ने पर्सनल लोन से स्मॉल कैप शेयरों में निवेश कर 40% मुनाफा कमाया, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे ट्रेंड लंबे समय में फाइनेंशियल तबाह का कारण बन सकते हैं, क्योंकि हर निवेशक हमेशा ‘लकी’ नहीं होता।







