लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। वर्ष 2029 से महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने तथा लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में गिरने के बाद विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
इस बीच सांसद इकरा हसन ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा में बिल गिरने के बाद भी सत्ता पक्ष यह स्पष्ट नहीं कर पा रहा है कि वह किस बात का ढिंढोरा पीट रहा है। उन्होंने कहा कि आज जो विधेयक गिरा है, वह महिला आरक्षण बिल नहीं है।
इकरा हसन के अनुसार, वास्तविक महिला आरक्षण बिल, जो वर्ष 2023 में पारित हो चुका है, वह आज भी यथावत लागू स्थिति में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकसभा में केवल वह संशोधन प्रस्ताव गिरा है, जो परिसीमन से संबंधित था। उनके मुताबिक, इस संशोधन के जरिए सरकार अपने अनुसार देश के इलेक्टॉरल मैप में बदलाव करना चाहती थी।




