लखनऊ: समाजवादी छात्र सभा के नेतृत्व में आज लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया गया। बड़ी संख्या में छात्रों ने इस फैसले की निंदा करते हुए अपना आक्रोश जताया।
विश्वविद्यालय के गेट संख्या 1 स्थित DSW कार्यालय के बाहर छात्रों ने करीब 4 घंटे तक धरना दिया। इसके पश्चात कुलपति को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सत्र 2025-26 की तुलना में सत्र 2026-27 के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रति सेमेस्टर शिक्षा शुल्क में बड़े स्तर पर वृद्धि की गई है। इसमें बी.ए ऑनर्स, बी.कॉम ऑनर्स, बी.ए एलएलबी, एमएससी बायोटेक और एमएससी बायोकेम जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं।

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि यह निर्णय बड़ी संख्या में छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित कर सकता है। उनका मानना है कि इस तरह के फैसले राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करेंगे।
छात्रों ने इस मुद्दे को ध्यान में रखते हुए दो प्रमुख मांगें रखीं—
1. सत्र 2025-26 की सेमेस्टर फीस प्रणाली को बिना किसी संशोधन के नए सत्र में भी लागू किया जाए।
2. फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज मुकदमों और अनुशासनात्मक कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।

छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि 6 दिनों के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे राष्ट्रव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
प्रदर्शन के आयोजक और समाजवादी छात्र सभा के इकाई अध्यक्ष प्रिंस कुमार ने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय एक सरकारी संस्थान है, जिस पर गरीब, किसान और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों का भविष्य निर्भर करता है। उनके अनुसार फीस वृद्धि जैसा कदम इन छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाला है।
इस दौरान लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अभिषेक श्रीवास्तव बाबू, इकाई महासचिव रजत अग्रहरि, इकाई उपाध्यक्ष शिवपूजन पांडे, इकाई प्रवक्ता सतीश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में छात्र नेता और सैकड़ों छात्र मौजूद रहे।






