‘गुंडा एक्ट’ आखिर है क्या? पुलिस क्यों लगाती है गुंडा एक्ट? जानिए कानून का पूरा सच:

कानून की बात: क्या है ‘गुंडा एक्ट’ और क्या कहता है हमारा संविधान? भारत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकारें कुख्यात और अभ्यस्त अपराधियों पर ‘गुंडा एक्ट’ लगाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय संविधान में इसका क्या आधार है? आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं:

राज्य सरकार का अधिकार:भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची (राज्य सूची) के तहत ‘लोक व्यवस्था’ (Public Order) और ‘पुलिस’ राज्य का विषय है। इसीलिए अलग-अलग राज्यों के अपने गुंडा एक्ट हैं, जैसे यूपी गुंडा एक्ट, 1970।

अपराध से पहले रोकने की शक्ति: संविधान का अनुच्छेद 22(3) सरकार को यह शक्ति देता है कि यदि कोई व्यक्ति समाज के लिए खतरा है, तो उसे अपराध करने से रोकने के लिए पहले ही जिला बदर (Externment) या निरुद्ध किया जा सकता है।

आवागमन पर रोक: जब किसी अपराधी को जिला बदर किया जाता है, तो संविधान का अनुच्छेद 19(5) आम जनता के हित में उसके घूमने-फिरने की आजादी पर ‘उचित प्रतिबंध’ लगाने की इजाजत देता है।

‘गुंडा एक्ट’ समाज की सुरक्षा के लिए है, लेकिन यह पूरी तरह से संविधान के दायरे में रहकर ही काम करता है।

हर किसी पर नहीं लग सकता ‘गुंडा एक्ट’!

गुंडा एक्ट के नियम और सुप्रीम कोर्ट की कड़ी सीमाएं: अक्सर लोगों में भ्रम होता है कि पुलिस किसी पर भी गुंडा एक्ट लगा सकती है। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) और हाई कोर्ट के नियमों के अनुसार, किसी नागरिक पर यह एक्ट लगाने के लिए बेहद सख्त कानूनी शर्तों का पालन करना पड़ता है:

विधिक रूप से ‘गुंडा’ कौन? कानून के अनुसार केवल वही व्यक्ति गुंडा श्रेणी में आता है जो ‘अभ्यस्त अपराधी’ (Habitual Offender) हो, यानी जो बार-बार गंभीर अपराध करता हो।

एक केस पर कार्रवाई नहीं: केवल एक या दो सामान्य मुकदमों के आधार पर किसी भी व्यक्ति को गुंडा घोषित नहीं किया जा सकता।

बरी मामलों का इस्तेमाल अवैध: यदि कोई व्यक्ति किसी पुराने केस में अदालत से बरी (Acquit) हो चुका है, तो पुलिस उस पुराने केस को आधार बनाकर गुंडा एक्ट नहीं लगा सकती।

पुराने मामलों पर रोक: सालों पुराने ठंडे पड़े मामलों को अचानक आधार बनाकर जिला बदर (Externment) की कार्रवाई नहीं की जा सकती। वर्तमान खतरे और पुराने मुकदमों में सीधा संबंध होना जरूरी है।

अपील का अधिकार: यदि किसी पर गलत तरीके से यह आदेश जारी होता है, तो संविधान के अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के तहत उसे मंडलायुक्त (Commissioner) और हाई कोर्ट में चुनौती देने का पूरा अधिकार है।

Info Source: Official Constitution of India (legislative.gov.in)

  • Related Posts

    हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने वालों के आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला:
    • October 15, 2026

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम या किसी अन्य गैर-हिंदू धर्म को अपनाने वाला व्यक्ति केवल अपने पूर्व धर्म में पिछड़े वर्ग से संबंधित होने…

    Continue reading
    सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी से पुलिस व्यवस्था पर नई बहस, क्या भंग हो सकती है पूरी राज्य पुलिस?
    • October 1, 2026

    Supreme Court: उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट की हालिया तल्ख टिप्पणी के बाद देशभर में पुलिस की कार्यप्रणाली और उसकी जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *