सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार एक संवैधानिक गारंटी है, जिसे नकारा नहीं जा सकता। कोर्ट ने संकेत दिया कि वह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के लिए पूरे देश में लागू होने वाले एक प्रोटोकॉल को बनाने पर विचार करेगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस प्रोटोकॉल में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए उचित स्थान की व्यवस्था होनी चाहिए और साथ ही अधिकारियों को असामाजिक तत्वों से निपटने की सुविधा भी मिलनी चाहिए। ये टिप्पणियां उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गईं, जिनमें पुलिस की ज्यादतियों का आरोप लगाया गया था।
इन आरोपों में NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व परीक्षा प्रणाली में अन्य अनियमितताओं को लेकर विरोध कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल शामिल था।




