लोकसभा में प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने को लेकर भी जोरदार हंगामा देखने को मिला। संसद के बाहर राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने “रेपिस्ट की पैरवी करने वाले शख्स” को शिक्षा मंत्री बनाया है। इसी मुद्दे को प्रियंका गांधी ने भी लोकसभा में उठाया, हालांकि उनकी यह टिप्पणी बाद में सदन की कार्यवाही से हटा दी गई।
प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और प्रह्लाद जोशी ने इसे उनका चरित्र हनन बताते हुए कहा कि प्रियंका गांधी अपने आरोपों के सबूत पेश करें और सदन से माफी मांगें।
इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा, मैं प्रियंका जी से कहना चाहूंगा कि बिना तथ्यों के इस तरह की बातें सदन में न करें। इस पर प्रियंका गांधी ने जवाब देते हुए कहा, जोशी जी ने बिल्किस बानो के बलात्कारियों पर जो बयान दिया था, उसका प्रमाण मैं भेज दूंगी।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, “इन्होंने इंदिरा गांधी का नाम लिया है, आप उसे कार्यवाही से हटा नहीं सकते।” वहीं निशिकांत दुबे ने कहा, “मैंने नेहरू जी का नाम लिया था और आज भी अपने बयान पर कायम हूं। “प्रह्लाद जोशी ने अपनी सफाई में कहा, “मेरे बारे में जो कहा गया, उसकी पहले से मुझे कोई जानकारी नहीं थी।”
इस दौरान स्पीकर ओम बिड़ला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “सदन में केवल इसी विधेयक पर चर्चा होगी। सभी सदस्य सिर्फ बिल से जुड़े विषय पर ही बोलें।
इससे पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “सरकार वचन नहीं, सिर्फ जुमले देती है।दोपहर का सत्र शुरू होने पर स्पीकर ओम बिड़ला ने जानकारी दी कि इस विधेयक पर चर्चा के लिए पहले 6 घंटे का समय तय किया गया था। यदि सत्ता पक्ष और विपक्ष सहमत हों तो चर्चा का समय बढ़ाया जा सकता है।
इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने सभी दलों से बातचीत की है और अब इस विधेयक पर 8 घंटे चर्चा होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो सरकार 10 घंटे तक चर्चा कराने के लिए भी तैयार है।




