पंडित रामअनंत पांडेय की गिरफ्तारी के बाद बलिया में अंग्रेजों के खिलाफ तेज हुआ था जनआंदोलन:

बलिया, 11 अगस्त 1942 (ऐतिहासिक स्मरण) | 1942 की अगस्त क्रांति का हर दिन बलिया की बागी धरती पर स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दे रहा था। ब्रिटिश शासन के अत्याचारों से त्रस्त बलियावासियों के भीतर आज़ादी की ज्वाला लगातार प्रचंड होती जा रही थी। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में सभाएं आयोजित हो रही थीं, जहां महात्मा गांधी के संदेशों के साथ बलिया की अस्मिता और स्वाधीनता की रक्षा का संकल्प लिया जा रहा था।

11 अगस्त 1942 को बलिया नगर के विद्यालयों से निकले छात्र-छात्राओं ने विशाल जुलूस निकाला, जिसने पूरे नगर का भ्रमण किया। जुलूस शहीद पार्क चौक पहुंचा, जहां एक विराट जनसभा आयोजित हुई। सभा में बड़ी संख्या में नागरिकों, युवाओं और छात्रों ने भाग लिया और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध अपने आक्रोश का खुलकर प्रदर्शन किया। सभा को संबोधित करते हुए तत्कालीन जिला कांग्रेस कमेटी के प्रधानमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी पंडित रामअनंत पांडेय ने लगभग पौने दो घंटे तक ओजस्वी भाषण दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आंदोलन पूरी तरह अहिंसात्मक रहेगा, लेकिन इसका उद्देश्य अंग्रेजी शासन को पूरी तरह निष्प्रभावी करना है।

उन्होंने जनता से यातायात ठप करने, सरकारी कार्यों का बहिष्कार करने, कचहरियों को बंद कराने तथा प्रशासनिक व्यवस्था पर जनता का अधिकार स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा कि अंग्रेजी हुकूमत का अंत होने तक संघर्ष जारी रहेगा। साथ ही, बाजारों को पूर्णतः बंद रखकर आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की।

सभा स्थल को पुलिस ने चारों ओर से घेर रखा था। लेकिन सभा समाप्त होते ही जनसैलाब कचहरी की ओर बढ़ गया और वहां का समस्त कार्य ठप कराकर ही वापस लौटा। यह अंग्रेजी शासन के लिए एक स्पष्ट और सीधी चुनौती थी। इसी दिन दोपहर लगभग तीन बजे ब्रिटिश प्रशासन ने पंडित रामअनंत पांडेय को गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी की खबर फैलते ही पूरे जनपद में रोष की लहर दौड़ गई। रानीगंज बाजार पूरी तरह बंद रहा और क्रांतिकारियों ने विशाल जुलूस निकालकर अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जोरदार प्रदर्शन किया।

जिले के विभिन्न स्थानों पर विरोध सभाएं आयोजित हुईं और जनता ने गिरफ्तारियों का तीखा विरोध किया। उधर, सिकंदरपुर थाने के तत्कालीन थानेदार ने खेजुरी मंडल कांग्रेस कार्यालय पर छापा मारकर महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए और कार्यालय पर ताला जड़ दिया। इस दमनात्मक कार्रवाई ने जनता के आक्रोश को और भड़का दिया। इसके विरोध में रानीगंज, बिल्थरारोड, खेजुरी सहित जनपद के अनेक क्षेत्रों में विशाल जुलूस निकाले गए। स्वतंत्रता आंदोलन ने अब और अधिक व्यापक एवं उग्र स्वरूप धारण कर लिया था।

11 अगस्त बना निर्णायक मोड़: 11 अगस्त 1942 का दिन बलिया के स्वतंत्रता संग्राम में एक निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ। पंडित रामअनंत पांडेय की गिरफ्तारी ने आंदोलन को दबाने के बजाय उसे और अधिक प्रबल बना दिया। गांव-गांव में क्रांति की अलख जाग उठी और यही जनसैलाब आगे चलकर बलिया को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने वाले ऐतिहासिक जनविद्रोह की सुदृढ़ नींव बना। बलिया के स्वतंत्रता संग्राम का यह अध्याय आज भी साहस, त्याग और जनशक्ति का प्रेरणास्रोत है।

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