लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के कैलाश छात्रावास की छात्राओं ने मेस की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर शिकायतें उठाई हैं। छात्राओं का आरोप है कि मेस में आए दिन खाने में कीड़े और बाल मिलते हैं। बर्तनों की ठीक से सफाई नहीं की जाती और कई बार जूठे बर्तनों में ही खाना परोसा जाता है। छात्राओं के मुताबिक, रसोई परिसर में भी लंबे समय से कचरा जमा है।

इसके अलावा मेस कर्मचारियों पर छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप लगाया गया है। छात्राओं का कहना है कि इन समस्याओं को लेकर वे पहले छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. अमिता कनोजिया से मिलने पहुंचीं, लेकिन आरोप है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुनने के बजाय उन्हें हड़काया गया।

इसके बाद छात्राओं ने कुलपति कार्यालय का घेराव किया। मौके पर चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी, चीफ प्रोवोस्ट प्रो. आशीष अवस्थी और प्रो. ओपी शुक्ला पहुंचे, जिसके बाद छात्राओं की कुलपति से मुलाकात कराई गई। इस दौरान लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र नेता एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समाजवादी लोहिया वाहिनी अभिषेक श्रीवास्तव ‘बाबू’, हिमांशु यादव, अक्षय वर्मा, धीरज यादव, अजीतेंद्र, रुस्तम, छात्र नेता अमन दुबे, विराट सहित कई छात्र मौजूद रहे।
छात्र नेता एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समाजवादी लोहिया वाहिनी अभिषेक श्रीवास्तव ‘बाबू’ ने कहा कि छात्राओं और मेस से जुड़ी समस्याएं बेहद गंभीर हैं। छात्रों और छात्राओं की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मेस के लिए 40 हजार रुपये लिए जाने के बावजूद खाने में कीड़े और गंदगी की शिकायतें सामने आ रही हैं।

मेंस में सड़ा हुआ मटर मिला
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्राओं को न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
छात्राओं की ओर से मेस और छात्रावास से जुड़ी कई अन्य समस्याएं भी सामने रखी गईं—
1. साफ पीने के पानी की समस्या: छात्राओं ने छात्रावास में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था को लेकर शिकायत की।
2. खाने की गुणवत्ता पर सवाल: छात्राओं का आरोप है कि मेस के खाने की गुणवत्ता बेहद खराब है और लगातार करीब एक महीने से कई बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। छात्राओं के अनुसार, एक छात्र के लीवर में इन्फेक्शन होने के कारण हजारों रुपये दवाइयों पर खर्च हुए हैं। छात्राओं ने सवाल उठाया कि इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा।
3. शिकायतों की अनदेखी का आरोप: छात्राओं का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद छात्र कल्याण अधिष्ठाता और चीफ प्रोवोस्ट की ओर से उनकी बात नहीं सुनी गई और छात्रों पर ही चुप रहने का दबाव बनाया गया।
4. मेस संचालन और टेंडर को लेकर सवाल: छात्राओं का आरोप है कि मेस का टेंडर किसी बाहरी संचालक को दिए जाने के बाद खाने की उचित आपूर्ति नहीं हो पा रही है और छात्रों को कथित तौर पर निम्न गुणवत्ता का सामान खिलाया जा रहा है। छात्राओं का कहना है कि इस पर भी उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
5. टेंडर में रिश्तेदारी का आरोप: छात्राओं की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि इस बार मेस का टेंडर विश्वविद्यालय के किसी बड़े अधिकारी के रिश्तेदार को दिया गया है, जिसके कारण उन्हें इन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
छात्राओ और छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मेस की व्यवस्थाओं, खाने की गुणवत्ता, साफ-सफाई, पेयजल और शिकायतों के निस्तारण पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की है। उनका कहना है कि समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें नजर अंदाज नहीं किया जाना चाहिए।




