नई दिल्ली: भारत में डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित बनाने की दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI ने एक ऐतिहासिक बदलाव लागू किया है।
1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी अनजान या नए व्यक्ति को 10,000 से अधिक का ऑनलाइन भुगतान करने पर पैसे तुरंत ट्रांसफर नहीं होंगे। इसके लिए 4 घंटे का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ अनिवार्य कर दिया गया है।
क्या है नया नियम और यह कैसे काम करेगा?
अक्सर साइबर अपराधी आम जनता को झांसे में लेकर मोटी रकम तुरंत ट्रांसफर करवा लेते थे। इसे रोकने के लिए सरकार ने यह ‘टाइम गैप’ सिस्टम पेश किया है।
पहला ट्रांजेक्शन: यदि आप किसी ऐसी UPI ID पर पहली बार 10,000 या उससे ज्यादा भेज रहे हैं जिससे पहले कभी लेन-देन नहीं हुआ, तो वह ट्रांजेक्शन 4 घंटे तक ‘होल्ड’ पर रहेगा।
वेरिफिकेशन का समय: इस दौरान यूजर के पास ट्रांजेक्शन को रिव्यू करने और गलत होने की स्थिति में उसे रद्द करने का पूरा समय होगा।
1 घंटे का विकल्प: कुछ विशेष मामलों और बैंकों में यह सीमा न्यूनतम 1 घंटे से शुरू होती है, लेकिन बड़े अमाउंट के लिए 4 घंटे का मानक तय है।
आम जनता पर क्या होगा असर?
आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह नियम केवल ‘फर्स्ट टाइम पेमेंट’ पर लागू है।
1. पुराने कॉन्टैक्ट्स: आपके दोस्त, परिवार या नियमित दुकानदार जिन्हें आप पहले पैसे भेज चुके हैं, उन्हें भुगतान हमेशा की तरह Instant (तुरंत) ही होगा।
2. इमरजेंसी पेमेंट्स: अस्पताल या शैक्षणिक संस्थानों जैसे प्रमाणित मर्चेंट्स को इस नियम से छूट दी गई है ताकि आपात स्थिति में देरी न हो।
सुरक्षा के अन्य कड़े इंतज़ाम:
UPI PIN के साथ-साथ अब बड़े ट्रांजेक्शन के लिए Biometric (फिंगरप्रिंट या फेस आईडी) को भी अनिवार्य किया जा रहा है। साथ ही, नए UPI यूजर्स के लिए रजिस्ट्रेशन के पहले 24 घंटों में ट्रांजेक्शन की सीमा मात्र 5,000 सीमित कर दी गई है।
विशेषज्ञ की राय: साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस 4 घंटे की देरी से देश में होने वाले 70% से अधिक डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगेगी, क्योंकि फ्रॉड होने के तुरंत बाद यूजर को रिफंड पाने का एक मौका मिल जाएगा।




