हरदोई – छह बार पैमाइश के बाद भी चकमार्ग पर कब्ज़ा बरकरार, किसान बेहाल :

हरदोई ;
ग्राम सलेमपुर मजरा डही, विकासखंड अहिरोरी, थाना बेनीगंज तहसील सदर के निवासी डॉ. जयकरन पुत्र स्व. पंचम ने चकमार्ग गाटा संख्या 1838 (रकबा 0.97 हेक्टेयर, लम्बाई 205 मीटर व चौड़ाई 4 मीटर) पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है।

यह चकमार्ग प्रथम चकबंदी (1960-62) से ही राजस्व अभिलेखों में दर्ज है और डॉ. जयकरन की कृषि भूमि तक पहुँचने का एकमात्र मार्ग है। लेकिन पड़ोसी काश्तकार श्रीकृष्ण, सीताराम पुत्र स्व. हुल्ला एवं सूरज कुमार पुत्र हीरालाल ने अपने गाटों 1837 व 1832 में इसे शामिल कर वर्षों से कब्ज़ा कर रखा है।

चकबंदी प्रक्रिया में भी कब्ज़ा बरकरार :
वर्ष 2008 की दूसरी चकबंदी प्रक्रिया में चकमार्ग की निशानदेही अलग से कर दी गई थी, परंतु कब्जाधारियों ने दोबारा मार्ग पर कब्ज़ा जमाते हुए यूक्लिप्टस के पेड़ लगा दिए।
डॉ. जयकरन ने कई बार चकबंदी अधिकारी से प्रार्थना पत्र देकर चकमार्ग खुलवाने की मांग की, आदेशों के बावजूद अतिक्रमणकारियों ने कब्ज़ा नहीं छोड़ा।

राजस्व टीम की कार्रवाई :
मुख्यमंत्री को भेजे गए IGRS प्रार्थना पत्र (संदर्भ संख्या 40015520102812, दिनांक 02/12/2024) पर कार्रवाई करते हुए राजस्व टीम ने 29/12/2024 को स्थल निरीक्षण किया।

लेखपाल व राजस्व निरीक्षक ने चकमार्ग की पैमाइश कर कब्ज़ा प्रमाणित किया और ग्राम भूमि प्रबंधन समिति की मौजूदगी में 205 मीटर लंबा व 4 मीटर चौड़ा चकमार्ग अलग से सीमांकित किया।

लेकिन कब्जाधारियों ने विरोध जताते हुए साफ कहा कि जब तक उनका “पूरा रकबा” नहीं मिलेगा, तब तक चकमार्ग नहीं छोड़ेंगे।

इसके बाद 2 मार्च 2025 को दोबारा पैमाइश की गई, जिसमें भी चकमार्ग पर कब्ज़ा बरकरार पाया गया, अब तक छह बार पैमाइश और निशानदेही हो चुकी है, लेकिन कब्ज़ा जस का तस है।

धमकियाँ और निर्माण में बाधा :
चकमार्ग की पैमाइश के बाद अतिक्रमणकारी काश्तकारों के बेटे हरिनाम, नीलकंठ, विशेष और बबलू (पुत्र श्रीकृष्ण) तथा उनकी पत्नियों ने प्रार्थी को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है।

वहीं, 20/05/2025 से 04/06/2025 तक ईएमआर संख्या 584 एवं 587 के तहत चकमार्ग पर मिट्टी पटान कार्य शुरू होना था, लेकिन पेड़ लगे होने और अतिक्रमणकारियों के कब्जे के कारण कार्य नहीं हो सका, ग्राम विकास विभाग का कहना है कि जब तक कब्जा मुक्त नहीं होगा, निर्माण संभव नहीं है।

किसान की पीड़ा :
डॉ. जयकरन का कहना है कि वर्षों से उन्हें अपने ही खेत तक जाने के लिए रास्ता उपलब्ध नहीं है, ट्रैक्टर-ट्रॉली और कृषि उपकरण ले जाने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग न होने से वे लगातार परेशान और पीड़ित हैं।

सुपुर्दगीनामा

सूचना पत्र

अब यह मामला जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है, लेकिन लगातार पैमाइश, निशानदेही और आदेशों के बावजूद कब्जा न हटना प्रशासनिक विफलता पर सवाल खड़े करता है।

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