Instagram पर अब कोई चैट Safe नहीं? Meta के बड़े फैसले से मचा हड़कंप:

आज से Instagram पर प्राइवेट चैट करना बंद कर दें, Meta ने पहले ही कर दिया सावधान… बाद में सिर्फ पछताएंगे!

अगर आप भी Instagram पर प्राइवेट बातें करते हैं तो हो जाएं सावधान। आज के समय में Instagram पर प्राइवेट चैट करना एक ऐसा खतरा बन सकता है, जिससे आपकी पूरी डिजिटल दुनिया में सेंध लग सकती है। चैट से लेकर फोटो और वीडियो तक अब पहले जैसे सेफ नहीं रहेंगे। ये दावा हम नहीं कर रहे, बल्कि खुद Instagram की तरफ से बड़ा संकेत दिया गया है।

Instagram ने अपनी पॉलिसी में बड़ा बदलाव कर दिया है। Meta ने Instagram से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन यानी E2EE का सुरक्षा कवच पूरी तरह हटा लिया है। इसका सीधा मतलब है कि आज से आपके प्राइवेट मैसेज उतने प्राइवेट नहीं रहेंगे, जितने अब तक माने जाते थे।

आखिर Mark Zuckerberg की कंपनी ने इतना बड़ा और जोखिम भरा फैसला क्यों लिया? और इसका आपकी प्राइवेसी पर कितना बड़ा असर पड़ने वाला है?

Meta ने 8 मई से ऑफिशियली Instagram पर मिलने वाले एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फीचर को समाप्त कर दिया है। अब Instagram के डायरेक्ट मैसेज उस अभेद्य सुरक्षा कवच के दायरे में नहीं रहेंगे, जिसकी शुरुआत 2023 में की गई थी। यानी अब आपके चैट्स पहले की तरह पूरी तरह प्राइवेट नहीं रह जाएंगे।

हालांकि Meta ने इस बड़े बदलाव की जानकारी मार्च में ही दे दी थी। कंपनी ने Instagram यूजर्स को निर्देश दिए थे कि यदि उनके पास कोई प्राइवेट मीडिया या जरूरी मैसेज हैं, तो वे उन्हें डाउनलोड और बैकअप कर लें। क्योंकि एन्क्रिप्शन हटने के बाद इन मैसेज तक पहुंच बनाना संभव हो सकता है, जिससे प्राइवेसी को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं।

फिलहाल यह बदलाव सिर्फ Instagram तक सीमित बताया जा रहा है। Meta के दूसरे ऐप्स में अभी यह बदलाव लागू नहीं हुआ है। साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह चाइल्ड सेफ्टी और ऑनलाइन अपराधों पर निगरानी है।

मार्च 2026 में न्यू मैक्सिको की एक जूरी ने Meta पर 375 मिलियन डॉलर का भारी जुर्माना लगाया था। कंपनी पर आरोप था कि उसने यूजर्स को प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर गुमराह किया, जिससे बाल उत्पीड़न जैसी घटनाओं को बढ़ावा मिला।

एन्क्रिप्शन हटने के बाद अब Meta जरूरत पड़ने पर मैसेज स्कैन कर सकेगा। इससे CSAM, ग्रूमिंग और ऑनलाइन अपराधों को रोकने में मदद मिलने की बात कही जा रही है। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देशों की सरकारें भी लंबे समय से टेक कंपनियों पर दबाव बना रही थीं कि वे प्राइवेट मैसेजिंग ऐप्स पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें।

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