नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी। दोनों याचिकाएं स्पेशल इंटेन्सिव रिवीजन (SIR) से जुड़े फैसलों को लेकर दाखिल की गई हैं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि SIR से संबंधित करीब 14 फैसले दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।
याचिकाकर्ताओं ने इन फैसलों को रद्द करने, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने और SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने की SIT जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा अंतिम फैसला आने तक CEC को पद के कामकाज से अलग रखने की मांग भी की गई है। मामले की सुनवाई CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच करेगी।
याचिकाओं में दावा किया गया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ नाम हटाए गए।
पहली याचिका में क्या मांग?
पटना निवासी राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर पहली याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है। ऐसे में आयोग के फैसले एकतरफा तरीके से नहीं लिए जा सकते।याचिका में चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवादित कदम संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप उठाए गए थे या नहीं।
अंतरिम राहत के तौर पर याचिकाकर्ता ने ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से निलंबित करने की मांग भी की है।
दूसरी याचिका में 14 फैसलों को रद्द करने की मांग:
दूसरी याचिका एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की है। इसमें कथित तौर पर एकतरफा लिए गए 14 फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग या SIT गठित करने की मांग की गई है। प्रस्तावित जांच में साइबर सिक्योरिटी और IT एक्सपर्ट्स को भी शामिल करने की बात कही गई है।
इसके साथ ही ECINet और ERONet डेटाबेस के फोरेंसिक ऑडिट की मांग भी की गई है। याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ नाम हटाए जाने की परिस्थितियों की भी जांच कराने की मांग की गई है।

















































