स्वतंत्रता दिवस पर PM मोदी का ‘दिमागी नक्सल’ बयान बना सियासी मुद्दा:

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 80वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2026) के मौके पर लाल किले की प्राचीर से दिया गया ‘दिमागी नक्सल’ (मेंटल नक्सलिज्म) वाला बयान देश की राजनीति का मुख्य केंद्र बन गया है। इस बयान के बाद संसद से लेकर सोशल मीडिया तक राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बयान का पुरजोर समर्थन किया है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश करार दिया है।

पीएम मोदी का मुख्य बयान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में देश की प्रगति और आंतरिक सुरक्षा का जिक्र करते हुए एक नया शब्द इस्तेमाल किया था।

उन्होंने कहा था: “देश ने हथियारों के दम पर चलने वाले सशस्त्र नक्सलवाद को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है। लेकिन अब समाज में एक नया खतरा ‘दिमागी नक्सल’ के रूप में उभर रहा है। ये लोग वैचारिक रूप से समाज में निराशा, डर और अविश्वास फैलाने का काम कर रहे हैं। देश को आगे बढ़ने से रोकने वाली इन ताकतों को पहचानना और समाज से अलग-थलग करना बेहद जरूरी है।

भाजपा ने दी ‘दिमागी नक्सल’ की परिभाषा: विपक्ष के बढ़ते हमलों के बीच भाजपा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर प्रधानमंत्री के बयान को स्पष्ट किया। भाजपा प्रवक्ताओं के अनुसार: ‘दिमागी नक्सल’ वे लोग हैं जो विकास विरोधी एजेंडा चलाते हैं। ये तत्व देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास करते हैं।सुरक्षाबलों के खिलाफ नैरेटिव सेट करने वालों को इस श्रेणी में रखा गया है।

विपक्ष का तीखा पलटवार और ‘Proud’ होने का दावा: प्रधानमंत्री के इस बयान पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सहित पूरे इंडिया (I.N.D.I.A.) गठबंधन ने कड़ी आपत्ति जताई है।

पी. चिदंबरम का बयान: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ बोलना नक्सलवाद है, तो उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है।

जयराम रमेश का आरोप: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह सरकार का अपनी नाकामियों और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का पुराना तरीका है।

अन्य दलों की प्रतिक्रिया: विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार अपने आलोचकों और नागरिकों के अधिकारों की बात करने वालों को जानबूझकर ऐसे ‘लेबल्स’ से बदनाम कर रही है।

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