लखनऊ में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर पर रेड, 40 लड़कियों समेत 119 हिरासत में:

लखनऊ में इंटरनेशनल साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, आलीशान कॉल सेंटर पर पुलिस का छापा लखनऊ में नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियों वाले एक इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ है। इस कॉल सेंटर की बिल्डिंग का किराया और अन्य खर्च मिलाकर सालाना करीब 3 करोड़ रुपए बताया जा रहा है।

यहां नौकरी पाने के लिए 5 राउंड का इंटरव्यू देना पड़ता था। पुलिस को जब शक हुआ कि यह कॉल सेंटर नहीं, बल्कि साइबर ठगी का अड्डा है, तो बुधवार दोपहर यहां छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर से 40 लड़कियों समेत 119 लोगों को हिरासत में लिया गया। मौके से 100 लैपटॉप, 178 कॉलिंग फोन, कई डिजिटल मशीनें और अहम दस्तावेज बरामद किए गए।

फर्जी कॉल सेंटर की आड़ में यह गैंग किस तरह ठगी करता था, यहां किन-किन पदों पर कर्मचारी काम करते थे, उन्हें कितनी सैलरी मिलती थी, क्या टारगेट और इंसेंटिव तय था, पुलिस ने पूरे नेटवर्क का खुलासा कैसे किया और अब तक कितनी रकम की ठगी की जा चुकी है।

रात में एक्टिव होते थे जालसाजपुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर की आड़ में यहां से ‘डॉलर’ नाम का ऐप ऑपरेट किया जाता था। इसी के जरिए अमेरिका में रहने वाले लोगों को कॉल कर लालच दिया जाता और उनसे धोखाधड़ी की जाती थी। कॉल सेंटर मुख्य रूप से शाम 7 बजे से रात 3 बजे तक संचालित होता था। इसका मुख्य निशाना विदेशी नागरिक थे।

जालसाजों ने समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर दो ऑफिस किराये पर लेकर Solaris Solution के नाम से कंपनी बनाकर ठगी का नेटवर्क चला रखा था। विदेश में बैठा सरगना, भारत में ऑपरेशन मैनेजर संभाल रहे थे पूरा नेटवर्कछापेमारी के दौरान पुलिस ने नारायणदास खैराजानी, अहमदाबाद (गुजरात) निवासी ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार को पकड़ा। दोनों वर्तमान में गोमतीनगर विस्तार में रह रहे थे और ऑपरेशन मैनेजर के पद पर काम कर रहे थे।

भारत से पूरे ठगी नेटवर्क का संचालन यही दोनों संभाल रहे थे। इनके अधीन कई कर्मचारी काम कर रहे थे। पुलिस दोनों से पूछताछ कर मुख्य आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।दूसरे ऑफिस के कर्मचारियों से बात करने की भी नहीं थी अनुमतिरेड की सूचना मिलते ही एक कर्मचारी के परिजन मौके पर पहुंचे। उन्होंने कैमरे पर बोलने से इनकार किया, लेकिन बताया कि उनके बेटे ने यहां नौकरी के लिए 5 राउंड इंटरव्यू दिए थे।

ज्यादातर लड़के-लड़कियों को 34 हजार से 40 हजार रुपए प्रति माह की सैलरी पर रखा गया था। यदि किसी के जरिए ठगी सफल होती थी, तो ठगी गई रकम का 10 प्रतिशत इंसेंटिव भी दिया जाता था। बताया गया कि कई कर्मचारी हर महीने 80 हजार से 1 लाख रुपए तक कमा रहे थे।

जांच में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों को पता था कि वे साइबर ठगी का हिस्सा हैं। सभी को सैलरी कैश में दी जाती थी और घर आने-जाने के लिए ट्रांसपोर्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती थी। बिल्डिंग में मौजूद दूसरे ऑफिसों के कर्मचारियों से बातचीत करने की अनुमति नहीं थी।

शुरुआती जांच के मुताबिक, इस साइबर ठगी से रोजाना 35 से 40 लाख रुपए की कमाई हो रही थी। 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी का अनुमानपुलिस को कॉल सेंटर से मिले साक्ष्यों के आधार पर अनुमान है कि इस गिरोह ने अब तक विदेशी नागरिकों से 200 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की है।

अलग-अलग तरह के लालच देकर लोगों को जाल में फंसाया जाता था। बरामद सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। साथ ही पूरे ट्रांजैक्शन नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। बिल्डिंग पर ही सालाना 3 करोड़ रुपए का खर्चयह फर्जी कॉल सेंटर समिट बिल्डिंग के दो हिस्सों को किराये पर लेकर संचालित किया जा रहा था।

किराया और अन्य खर्च मिलाकर इस ऑफिस पर सालाना करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे थे। बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क करीब एक साल से संचालित हो रहा था। विदेश से शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, जिसके बाद इस बड़े साइबर ठगी गिरोह का खुलासा हो सका।

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