फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से नौकरी! सपा नेता रामफेर यादव पर केस दर्ज:

समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव रामफेर यादव एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। उनके खिलाफ फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला डुमरियागंज थाना क्षेत्र के सेखुई गोवर्धन गांव से जुड़ा हुआ है, जिसने स्थानीय स्तर पर हलचल मचा दी है।

आरोप है कि रामफेर यादव ने वर्ष 2011 में कथित तौर पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का सहारा लेकर ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) के पद पर नौकरी प्राप्त की थी। इस मामले की विभागीय जांच के बाद वर्ष 2017 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, लेकिन उस समय कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की गई थी।

अब मन्नीजोत गांव निवासी भाजपा नेता और ब्लॉक प्रमुख संघ के जिलाध्यक्ष लवकुश ओझा की शिकायत के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में आया है। ओझा ने 19 फरवरी को पुलिस उप महानिरीक्षक, बस्ती मंडल को शिकायती पत्र देकर इस प्रकरण को दोबारा उठाया, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई।

शिकायत में यह भी सामने आया कि आरोपी का दिव्यांग प्रमाण पत्र वर्ष 2011 में प्रतापगढ़ जनपद से जारी हुआ था, जिसमें उनका पता सरियापुर, पोस्ट नौवस्ता, थाना जेठवारा दर्ज था। वहीं, नौकरी मिलने के बाद उनकी सेवा पुस्तिका और अन्य दस्तावेजों में पता सेखुई गोवर्धन, जनपद सिद्धार्थनगर पाया गया। पते में इस अंतर ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया।

सपा नेता रामफेर यादव की तस्वीर, राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ

इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया है कि जिस शिविर में प्रमाण पत्र जारी हुआ था, वह तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जन्मदिन पर आयोजित किया गया था। ऐसे शिविरों में जारी प्रमाण पत्रों की वैधता पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभागीय जांच के दौरान आरोपी को कई बार मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के निर्देश दिए गए, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए।

आखिरकार, तत्कालीन जिला विकास अधिकारी और जांच अधिकारी सुदामा प्रसाद ने 24 अक्टूबर 2017 को दिव्यांग प्रमाण पत्र को फर्जी मानते हुए रामफेर यादव की सेवा समाप्त कर दी थी। हैरानी की बात यह है कि बर्खास्तगी के बावजूद करीब 6 वर्षों तक उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

अब उच्चाधिकारियों के निर्देश पर डुमरियागंज पुलिस ने रामफेर यादव के खिलाफ कूटरचना, धोखाधड़ी समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश यादव ने पुष्टि की है कि मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और सभी पहलुओं पर गहन जांच जारी है।

वहीं, रामफेर यादव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है। उनका कहना है कि उनका दिव्यांग प्रमाण पत्र पूरी तरह वैध है और सत्ता पक्ष के दबाव में आकर उनके खिलाफ कार्रवाई कराई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी उनके खिलाफ शिकायत की गई थी, जो फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।

यह मामला सरकारी नियुक्तियों की पारदर्शिता और जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर प्रमाण पत्र फर्जी था तो नियुक्ति के समय जांच क्यों नहीं हुई? और अगर गड़बड़ी सामने आ गई थी, तो इतने वर्षों तक कानूनी कार्रवाई क्यों टाली गई?

फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है, अब देखना होगा कि जांच से क्या निष्कर्ष सामने आता है और क्या इस मामले में सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी लंबे समय तक लंबित रहता है। यह पूरा प्रकरण न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर रहा है।

News Reported by: Mayank Kumar Yadav Reporter-(Up Live Express)

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