महराजगंज। जनपद की स्थापना के 36 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शुक्रवार से महराजगंज महोत्सव की धूम मचने जा रही है। तीन दिवसीय इस महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला देखने को मिलेगी, जिसमें स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ बाहरी मेहमान कलाकार भी प्रस्तुति देंगे। आयोजन स्थल पीजी कॉलेज ग्राउंड पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

महोत्सव का मंच
जनपद महराजगंज की स्थापना 2 अक्टूबर 1989 को गोरखपुर से अलग कर की गई थी। इसके बाद से जिले ने विकास की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए और अब यह अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। कभी जहां कई गांवों तक पहुंचना मुश्किल था, वहीं अब सड़क, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं ने विकास की तस्वीर बदल दी है।
1940 में जिले में केवल एक माध्यमिक विद्यालय (जीएसवीएस) हुआ करता था, जबकि आज उनकी संख्या 278 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा जिले में 100 से अधिक महाविद्यालय और 1400 से अधिक बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों सहित कुल 4000 से अधिक शिक्षण संस्थान संचालित हैं। तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चार राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज और चार आईटीआई संस्थान भी चल रहे हैं, इस वर्ष जिले के मुख्यालय को रेलवे सेवा की सौगात मिलने जा रही है, जिसके लिए पटरियां बिछाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है।
महोत्सव में ‘इत्र’ की खुशबू और ‘गुड़’ की मिठास :
महराजगंज महोत्सव में 54 जनपदों से 54 हस्तशिल्पी और उद्यमी अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाएंगे, उद्योग विभाग के माध्यम से सभी स्टॉल बुक किए जा चुके हैं।
उपायुक्त उद्योग अभिषेक प्रियदर्शी ने बताया कि इनमें ओडीओपी उत्पाद भी शामिल हैं। कन्नौज और हाथरस से आए शिल्पकार इत्र और धूपबत्ती की खुशबू बिखेरेंगे, वहीं अयोध्या के शिल्पी टंडन गुड़ की मिठास से आगंतुकों का मन मोहेंगे।
राजधानी लखनऊ से सर्वाधिक 11 स्टॉल जरी और एम्ब्रॉयडरी के हैं, जबकि हाथरस से 6 स्टॉल आर्टिफिशियल ज्वेलरी के हैं। सीतापुर से 8, रामपुर से 5, पीलीभीत से 2 स्टॉल लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा कुशीनगर से केले के रेशे से बने उत्पाद और सिद्धार्थनगर से ‘काला नमक’ चावल के स्टॉल आकर्षण का केंद्र होंगे।
महराजगंज महोत्सव जिले की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, कला और उद्यमिता का संगम बनकर जनपद की नई पहचान प्रस्तुत करेगा।
















































