नई दिल्ली: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के छह अंतरे गाना अनिवार्य करने वाले कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और कर्नाटक संगीतकार टी. एम. कृष्णा ने दाखिल की है।
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कानून बनाना नक्सलियों के हिसाब से नहीं होना चाहिए। इस टिप्पणी पर सीनियर एडवोकेट डॉ. एस. मुरलीधर ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि ऐसी बात वापस ली जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी गैर-जरूरी थी और कुछ मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। मुरलीधर ने आगे कहा कि कानून के अधिकारियों से ऐसी उम्मीद नहीं की जाती। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सीनियर एडवोकेट मुरलीधर के बीच तीखी बहस भी हुई।
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस जे. बागची ने कहा कि अदालत ने इस टिप्पणी पर ध्यान नहीं दिया है।
टी. एम. कृष्णा ने किस आधार पर दी चुनौती?
याचिकाकर्ता टी. एम. कृष्णा का कहना है कि वंदे मातरम के जो चार अतिरिक्त अंतरे अब गाने के लिए जोड़े गए हैं, उनमें धार्मिक प्रकृति के तत्व हैं। याचिका में राष्ट्रगीत के अपमान के लिए दंड के प्रावधान को भी चुनौती दी गई है।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रगीत क्या होना चाहिए, यह तय करना अदालत का काम नहीं है। हालांकि, राष्ट्रगीत के अपमान के लिए तय किए गए दंड के प्रावधान पर कोर्ट सुनवाई करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की प्रति सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को सौंपते हुए केंद्र सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा है।
12 अक्टूबर को अगली सुनवाई:
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 12 अक्टूबर तय की है। अब केंद्र सरकार के जवाब के बाद कोर्ट दंड संबंधी प्रावधानों को लेकर आगे सुनवाई करेगा।




