नई दिल्ली | 2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लगाने की व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (28 सितंबर) को केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI को नोटिस जारी किया। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल इस व्यवस्था पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने केंद्र सरकार, RBI और NPCI से 4 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिकाकर्ता की ओर से इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि इसे बिना उचित चर्चा के लाया जा रहा है और इसे लागू करते समय जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया। याचिका में दावा किया गया कि इससे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि UPI पर अतिरिक्त शुल्क लगने की स्थिति में इससे बचने के लिए लोगों और कारोबारियों के बीच दोबारा नकद भुगतान को बढ़ावा मिल सकता है। इससे देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लक्ष्य पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि UPI के आने के बाद से काले धन के लेन-देन में कमी आई है। इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल वेंकटरमन ने कहा कि यह व्यवस्था अभी लागू होना बाकी है और 15 अक्टूबर पहला पड़ाव है। उन्होंने कहा कि गेटवे का इस्तेमाल करने वाले 96 प्रतिशत लोगों को छूट मिली हुई है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सवाल किया कि इस तरह की वसूली करने का एग्जीक्यूटिव दायरा क्या है। उन्होंने पूछा कि अगर यह फीस होती तो इसे समझा जा सकता था, लेकिन जब यह फीस नहीं है तो फिर इसका स्वरूप क्या है?
सरकार ने क्या कहा?
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि डेबिट और क्रेडिट कार्ड से लेन-देन करने में लागत आती है और UPI भी इससे अलग नहीं है। उन्होंने बताया कि इस सेवा को दो ऑपरेटर उपलब्ध कराते हैं, जिनमें बैंक भी शामिल हैं। सरकार की ओर से कहा गया कि यह भारत सरकार द्वारा की जाने वाली वैधानिक वसूली नहीं है, बल्कि पेमेंट सिस्टम से जुड़े पक्षों के बीच सेटलमेंट फीस है, जिसे NPCI सुविधाजनक बनाता है। सरकार इसमें से एक रुपया भी नहीं ले रही है।
बता दें कि 16 सितंबर को 2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने की अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। अधिवक्ता अंजन दत्ता की ओर से दाखिल जनहित याचिका में इस व्यवस्था को कानून की नजर में समानता और व्यापार के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
नई व्यवस्था के तहत चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेन-देन में 2,000 से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होना है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली है।
















































