लखनऊ: ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के 17वें स्थापना दिवस (1 अक्टूबर) की पूर्व संध्या पर ड्रामेटिक्स क्लब द्वारा बुधवार को तीन रंगमंचीय प्रतियोगिताओं माइम एक्ट, फ्लैश थिएटर एवं ड्रामा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विभिन्न सामाजिक मुद्दों को रंगमंच के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए अपनी रचनात्मकता, अभिनय कौशल और सामाजिक संवेदनशीलता का परिचय दिया।

कार्यक्रम की कन्वेनर डॉ. ममता शुक्ला रहीं। आयोजन में डॉ. श्रेया जादौन, डॉ. काकुल हई, डॉ. सुषमा एवं श्री मृणाल झा ने समन्वयक की भूमिका निभाई। वहीं मोहम्मद शाद खान एवं तैय्यबा नूर छात्र समन्वयक रहे। माइम एक्ट में ‘एडिक्शन’ के जरिए दिया जागरूकता का संदेशकार्यक्रम की पहली प्रतियोगिता माइम एक्ट रही, जिसका विषय ‘एडिक्शन’ था।

प्रतियोगिता में 7 प्रतिभागियों ने बिना संवाद के अभिनय, भाव-भंगिमा और शारीरिक अभिव्यक्ति के माध्यम से नशे की समस्या एवं उसके सामाजिक दुष्प्रभावों को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता का निर्णयन डॉ. तहरीर फातिमा एवं डॉ. शान-ए-फातिमा ने किया।फ्लैश थिएटर में दिखी त्वरित अभिनय क्षमता और रचनात्मकतादूसरी प्रतियोगिता ‘फ्लैश थिएटर’ में कुल 4 प्रस्तुतियां हुईं, जिनमें 3 व्यक्तिगत एवं 1 समूह प्रस्तुति शामिल रही।

प्रतिभागियों ने सीमित समय में अपनी अभिनय क्षमता, रचनात्मक सोच और मंचीय प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का निर्णयन डॉ. पूनम चौधरी एवं डॉ. रुचिका सुजाई ने किया।
प्रतियोगिता के परिणाम:
प्रथम: मो आदिल, द्वितीय: अब्दुल्लाह गानी, तृतीय: मो शाहिल
‘विमेन एंड सोसाइटी’ के जरिए उठे समाज के महत्वपूर्ण सवाल: तीसरी प्रतियोगिता ड्रामा रही, जिसका विषय ‘विमेन एंड सोसाइटी’ था। इसमें तीन टीमों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से महिला जीवन, सामाजिक परिस्थितियों और लैंगिक असमानता से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता का निर्णयन प्रो. विभा सिंह एवं डॉ. अर्चना अस्थाना ने किया।
प्रतियोगिता के परिणाम:
प्रथम: ‘निर्मला’
द्वितीय: ‘बेटों वाली विधवा’
तृतीय: ‘साइलेंस! द कोर्ट इस इन सेशन’
छात्र स्वयंसेवकों ने निभाई अहम भूमिका:
कार्यक्रम को सफल बनाने में छात्र स्वयंसेवकों अंकित यादव, ज़ीशान गाज़ी, मेहदी रिज़वी, अजीजुल्लाह, राशिद खान, प्रभात, अनुराग यादव, सैफ अली खान, विशिष्ठ राजपूत एवं मोहम्मद अनस ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
समापन अवसर पर कन्वेनर डॉ. ममता शुक्ला ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने स्टूडेंट कॉर्डिनेटर मोहम्मद शाद खान एवं तैय्यबा नूर द्वारा आयोजन में किए गए प्रयासों और जिम्मेदारियों के निर्वहन की सराहना की। साथ ही उन्हें भविष्य में भी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रूप से कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
ड्रामेटिक्स क्लब का यह आयोजन इस संदेश के साथ सम्पन्न हुआ कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों को आवाज़ देने, संवाद स्थापित करने और विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने का एक प्रभावी माध्यम भी है।
















































