अखिलेश यादव का एक बयान इन दिनों काफी चर्चा में है। 15 अगस्त को पार्टी दफ्तर में उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा, चुनाव में समय कम है। ध्यान रखना, कोई ऐसा स्टेटमेंट नहीं आना चाहिए, जिसका फायदा BJP उठा ले। राजनीतिक गलियारों में अखिलेश यादव की इस नसीहत को शिवपाल यादव के हालिया बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।
रामपुर दौरे पर शिवपाल यादव ने कहा था— सरकार बनते ही आजम खान पर हुए हर जुल्म का बदला लेंगे। उन्हें गृहमंत्री बनाया जाएगा। आजम और संभल सांसद जियाउर्रहमान के सारे मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
अखिलेश यादव ने बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा की हार से सबक लेते हुए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संभलकर बोलने की हिदायत दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सवर्णों की नाराजगी के कारण भाजपा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की परंपरागत सीट नहीं बचा पाई। प्रशांत किशोर ने उपचुनाव में भरत तिवारी के कथित फेक एनकाउंटर का मामला उठाया था। इससे भाजपा 31 साल से जीतती आ रही सवर्ण बहुल सीट हार गई थी।
इसी तरह मई, 2026 में पार्टी प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने ब्राह्मणों पर विवादित बयान दिया था। तब भाजपा और बसपा के साथ ही सपा विधायकों ने भी नाराजगी जताई थी। इससे यूपी के 12% ब्राह्मण वोटबैंक के छिटकने का खतरा बढ़ गया था। पिछले 4 विधानसभा चुनाव पर नजर डालें, तो ब्राह्मणों को अपनी तरफ करने वाली पार्टी ही सत्ता में आई है।






